21
Jul
17

हमेशा की तरह

मेरे
ज़हन में बसने वाली
वह
कल
बहुत दिनों बाद
झुंझलाई सी
आई, और
धम्म से
तुनक कर
बैठ गयी;
और मैं
हमेशा की तरह
उसको
निहारता रहा|

घूर कर
मुझे
देखते हुए उसने
मेरे इर्द-गिर्द
बिखरी हुई साँसों के
तारों
को अपने तेवर से
समेटा;
और मैं
हमेशा की तरह
उसको
निहारता रहा|

न जाने कब
उसने
सिमटी हुई साँसों
को अपनी
आँखों में भर
आँसुओं
से तराना
पेश कर दिया;
और मैं
हमेशा की तरह
उसको
निहारता रहा|

किरकिराती
धूल पर
तराने के अक्षर-सुरों
ने फड़फड़ाती
परछाईयाँ
गोद दी;
और मैं
हमेशा की तरह
उसको
निहारता रहा|

कुछ नहीं है
तुम्हारे पास,
अब
कुछ भी नहीं
किसी को
देने के लिए;
सब तो लुटा दिया,
बाँट दिया,
इज़्ज़त तक को
तुम्हारी
तुम्हरों ने
कोठे पर
चढ़ा दिया;
और मैं
हमेशा की तरह
स्तब्ध
उसको निहारता रहा|

मेरे
निहारने को
वह
निहारती रही
और,
इंतज़ार की भी
हद होती है
का जुमला कान में
फूँक कर फिर
फरार
हो गई;
और मैं
हमेशा की तरह
धुंधली आँखों से
उसको
निहारने की
कोशिश में लगा रहा|

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