Archive for the 'Life' Category

21
Sep
17

इक घर

“मकान कई मिले , घर न बना पाए ” – मेघना
कुछ ऐैसी बात कह दी
जो दिल को छू गई,
चारदिवारियों के
इस कठोर बंजरात में
उस,
किसी,
अब
दुर्लभ होते
घर की ख्वाहिश
ज़हन में ज़हरीली
हूक मार गई।

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26
Aug
17

My 30 and others!

New Doc 2017-08-26_1

21
Jul
17

हमेशा की तरह

मेरे
ज़हन में बसने वाली
वह
कल
बहुत दिनों बाद
झुंझलाई सी
आई, और
धम्म से
तुनक कर
बैठ गयी;
और मैं
हमेशा की तरह
उसको
निहारता रहा|

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21
Jun
17

इसलिए

दिमाग फितूरी था
इसलिए
बहुत सोचा इक
दिन
फिर से
अपने बारे में;
और जाने किस
गुबार में
अष्टाव्रक जिंदगी
के उस कोने
की सफाई करने
चला।
22
Feb
17

The Dead and the Living

“I think I had a mother once…” – Peter Pan

I feel cheated.

Natural death has disregarded me.

Once again I have lost out.

With innumerable masks resounding with hushed, unspoken and unshed tears of shrieks, I am left in this shambles not knowing what to do? Where to go? Whom to talk to? What to talk about?  Whom to relate with?

*

The living are tiring.

*

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07
Jan
17

न जाने क्यों?

ख्वाबों के दरिया में
अचनाक
ताबीर आया, और
ज़ंक़े-जंगों से सजे
मेरी यादों के ताबूत में
एक दरार
नई
पड़ गयी.

न जाने क्यों
आज तुम
बहुत याद आए?

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18
Dec
16

#37

a question was

asked and the answer spat

out.

an arm extended only

to be pushed

away.

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