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07
Jan
17

न जाने क्यों?

ख्वाबों के दरिया में
अचनाक
ताबीर आया, और
ज़ंक़े-जंगों से सजे
मेरी यादों के ताबूत में
एक दरार
नई
पड़ गयी.

न जाने क्यों
आज तुम
बहुत याद आए?

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